Ten News Live

यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार ्टी ने कसी कमर

* दिल्ली बिग ब्रेकिंग÷

यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कसी कमर

आज शाम 4 बजे AICC में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे यूपी के कांग्रेसी विधायक

यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर होगा मंथन

सूबे की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में चल रही उठापटक पर भी होगी चर्चा

यूपी विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने या किसी अन्य दल से गठबंधन करने को लेकर भी होगी चर्चा

यूपी में कांग्रेस के कुल 28 विधायक थे जो अब घट-बढ़कर 20 रह गये हैं

जुलाई में हुए MLC और राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्राॅसवोटिंग को लेकर कुछ विधायकों ने ख़ुद छोड़ी थी पार्टी तो कुछ को कर दिया था पार्टी ने बाहर

उस्मान सिद्दीक़ी-दिल्ली।

CONGRESS UTTAR PRADESH MLAs TO MEET RAHUL GANDHI #YADAVVSYADAV

* दिल्ली बिग ब्रेकिंग÷

यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कसी कमर

आज शाम 4 बजे AICC में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे यूपी के कांग्रेसी विधायक

यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर होगा मंथन

सूबे की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में चल रही उठापटक पर भी होगी चर्चा

यूपी विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने या किसी अन्य दल से गठबंधन करने को लेकर भी होगी चर्चा

यूपी में कांग्रेस के कुल 28 विधायक थे जो अब घट-बढ़कर 20 रह गये हैं

जुलाई में हुए MLC और राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्राॅसवोटिंग को लेकर कुछ विधायकों ने ख़ुद छोड़ी थी पार्टी तो कुछ को कर दिया था पार्टी ने बाहर

उस्मान सिद्दीक़ी-दिल्ली।

दिल्ली राजधानी मे अंधविश्वास के चलते एक य ुवक ने बलि के नाम डेढ साल के बच्ची को पटक पटक कर मार डाला.

अंधविश्वास मे डेढ़ साल की बच्ची को पटक -पटक कर मार डाला।

दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अंधविश्वास मे एक सनकी युवक ने जल्द शादी की मन्नत के लिए देवी मां को बलि देने के नाम पर एक डेढ़ साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपी शख्स ने मासूम को मंदिर की सीढ़ियों पर पटक-पटककर मौत के घाट उतार दिया.
यह चौंकाने वाला मामला दिल्ली के रनहोला स्थित मोहन गार्डन इलाके का है. बीते सोमवार इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई जब वहां मौजूद लोगों ने एक युवक को बच्ची को पैरों से पकड़े हुए मंदिर की सीढ़ियों पर पटकते हुए देखा. पुलिस के मुताबिक, सोमवार को 25 साल के आरोपी शख्स ने पड़ोस में रहने वाली एक बच्ची को झासा देकर उसके घर से उठा लिया.
आरोपी युवक उसे पास ही स्थित एक मंदिर के सामने ले गया. जिसके बाद शुरू हुआ दिल दहला देने वाला अंधविश्वास का खूनी खेल. सनकी युवक ने पहले तो मासूम के पैरों की नसें काट दी और फिर जब बच्ची बेतहाशा रोने लगी तो युवक ने बच्ची के दोनों पैरों को पकड़ उसे उल्टा उठा लिया और मासूम को हवा में उछालते हुए बेरहमी से सीढ़ियों पर पटकने लगा.
जख्मी बच्ची की चीखें हमेशा के लिए वहीं पर थम गई. तभी वहां से गुजर रहे लोगों की युवक पर नजर पड़ी और वह युवक को पकड़ने के लिए दौड़ पड़े. लोगों को अपने पीछे आता देख आरोपी युवक बच्ची को गोद में लेकर भागने लगा. किसी तरह लोगों ने उसे पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की. बच्ची के परिजनों को जब इस वारदात की भनक लगी तो उनके होश उड़ गए.
आनन-फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ में आरोपी ने जब पुलिसकर्मियों को जल्द शादी के लिए देवी मां को बच्ची की बलि देने की बात बताई तो उसकी बात सुनकर सभी पुलिसकर्मी सन्न रह गयी।
जितेद्र पाल – (tennews.in)

आदमी पार्टी से विधायक अमानतुल्ला खान और उ नके कुछ समर्थकों पर एफआईआर दर्ज

आदमी पार्टी से विधायक अमानतुल्ला खान और उनके कुछ समर्थकों पर बुधवार (26 अक्टूबर) को एफआईआर दर्ज की गई। यह FIR दिल्ली के जामिया नगर थाने में दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अमानतुल्ला खान ने 16 और 17 अक्टूबर की रात को उसके ऊपर हमला किया था। आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब अमानतुल्ला खान के उपर केस दर्ज हुआ हो इससे पहले भी अमानतुल्ला खान और पर यौन उत्पीड़न के आरोप में दिल्ली पुलिस ने जामिया नगर से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान को गिरफ्तार था जिसके बाद उन्हें एक दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। कुछ दिन पहले अमानतुल्ला के खिलाफ उनके साले की पत्नी ने छेड़छाड़ की शिकायत जामिया नगर थाने में की थी जिसके बाद अमातुल्ला खान के खिलाफ पुलिस ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया था।
दिल्ली पुलिस को इस मामले से जुड़ी सीडी और पेन ड्राइव मिली थी, बताया जा रहा था कि इसमें आप विधायक के बीच हुई बात की रिकॉर्डिंग थी। इसके आधार पर पुलिस मामले की जांच के बाद पीड़ित महिला का बयान दर्ज किया था। मामले को लेकर विधायक अमानतुल्लाह खान पहले ही कह चुके थे कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। केजरीवाल सरकार ने ‘आप’ विधायक अमानतुल्ला खान पर लगे छेड़छाड़ के आरोपों को पारिवारिक विवाद बताते हुए उनका इस्तीफा खारिज कर दिया था। लेकिन आज। एक बार फिर आम आदमी पार्टी से विधायक अमानतुल्ला खान और उनके कुछ समर्थकों पर बुधवार (26 अक्टूबर) को एफआईआर दर्ज की गई। यह FIR दिल्ली के जामिया नगर थाने में दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अमानतुल्ला खान ने 16 और 17 अक्टूबर की रात को उसके ऊपर हमला किया था। हालांकि, हमला क्यों किया गया यह फिलहाल साफ नहीं है।

LOVE STORY OF MULAYAM SINGH YADAV , WHY AKHILESH YADAV IS ANGRY #yadavvsyadav

क्या है मुलायम सिंह यादव की प्रेम-कहानी और आख़िर क्यों चिढ़ते हैं अमर सिंह से अखिलेश यादव?

हरिगोविंद विश्वकर्मा

निश्चित तौर पर प्रखर परिवारवादी और समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने राजनीतिक जीवन के सबसे ज़्यादा संकट से गुज़र रहे हैं। देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के महाभारत में उनका अपना बेटा ही उनके सामने खड़ा हैं। इस संकट के बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में जो कुछ हो रहा है, उससे यही लगता है कि मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। देश के सबसे बड़े सूबे में शासन करने वाली पार्टी में जो घमासान चल रहा है, उसे दो तीन महीने पुराना मामला मानना भारी भूल होगी। इसके जड़ें महीने-दो महीने या साल दो साल नहीं बल्कि तीन दशक से ज़्यादा पुरानी हैं।

इतना ही नहीं, जो लोग समाजवादी पार्टी में मौजूदा कलह को चाचा-भतीजे यानी अखिलेश यादव और उनकी टीम में सर्वाधिक ताक़तवर मंत्री रहे शिवपाल यादव के बीच की वर्चस्व की लड़ाई मानकर चल रहे हैं, वे यक़ीनन भारी ग़लतफ़हमी में हैं। दरअसल, शतरंज के इस खेल में शिवपाल तो महज़ एक मोहरा भर हैं, जिन्हें अपने बड़े बेटे पर अंकुश रखने के लिए नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह कि मुलायम अपनी इच्छा से यह सब नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनसे यह सब करवाया जा रहा है। मुलायम जैसी शख़्सियत से यह सब कराने की क्षमता किसके पास है। यह भी समझने की बात है।

सबसे अहम बात यह कि मुलायम के जिगरी दोस्त राज्यसभा सदस्य और पॉलिटिकल मैनेजर ठाकुर अमर सिंह इस मामले पर पूरी तरह ख़ामोश हैं, फिर भी समाजवादी पार्टी के मौजूदा संकट में उनका नाम बार-बार आ रहा है। ऐसे परिवेश में आम लोगों को मन में सहज सवाल उठना लाज़िमी है कि आख़िर अखिलेश यादव अपने पिता के अभिन्न मित्र से इतना चिढ़ते क्यों हैं। इसका उत्तर जानने के लिए अस्सी के दौर में जाना पड़ेगा, जब समाजवादी पार्टी या जनता दल का अस्तित्व नहीं था और तब मुलायम सिंह यादव लोकदल के नेता हुआ करते थे।

1967 में बतौर विधान सभा सदस्य राजनीतिक सफ़र शुरू करने वाले मुलायम सिंह अस्सी के दशक तक राज्य के बहुत प्रभावशाली और शक्तिशाली नेता बन गए। चौधरी चरण सिंह के बाद संभवतः वह उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग और यादवों के सबसे ज़्यादा कद्दावर नेता हैं। राजनीतिक सफ़र में नेताओं के जीवन में महिलाएं आती रही हैं। जब मुलायम उत्तर प्रदेश की शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे तो उनके जीवन में अचानक उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता की एंट्री हुई।

मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की प्रेम कहानी कब शुरू हुई इस बारे में अधिकृत ब्यौरा किसी के पास नहीं है। कहा जाता है कि 1982 में जब मुलायम लोकदल के अध्यक्ष बने तब एक दिन उनकी नज़र अचानक पार्टी की गई युवा पदाधिकारी साधना पर पड़ी। तरुणी साधना बला की ख़ूबसूरत थीं, इतनी ख़ूबसूरत कि जो भी उन्हें देखता, सुध-बुध खोकर बस उन्हें देखता ही रह जाता था। मुलायम भी अपवाद नहीं थे। पहली मुलाक़ात में वह उम्र में 20 साल छोटी अद्भुत फिज़िकल फीचर वाली साधना गुप्ता को दिल दे बैठे। यहीं से मुलायम-साधना की अनोखी प्रेम कहानी शुरू हुई, जो तीस-बत्तीस साल बाद अंततः देश के सबसे ताक़तवर राजनीतिक परिवार में विभाजन की वजह बन रही है।
अस्सी के दशक में साधना गुप्ता और मुलायम सिंह के बीच क्या चल रहा है, इसकी भनक लंबे समय तक किसी को नहीं लगी। मुलायम के क़रीब आते ही साधना गुप्ता का फर्रुखाबाद के अपने पति चंद्रप्रकाश गुप्ता से अलगाव हो गया। इसी दौरान 1988 में साधना ने एक पुत्र प्रतीक गुप्ता (अब प्रतीक यादव) को जन्म दिया। कहते हैं कि साधना गुप्ता के साथ प्रेम संबंध की भनक मुलायम की पहली पत्नी और अखिलेश की मां मालती देवी को लग गई। वह बहुत ही आकर्षक और दान-धर्म में यक़ीन करने वाली महिला थीं। यहां यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि मुलायम का पूरा परिवार अगर एकजुट बना रहा है तो इसका सारा श्रेय मालती देवी को ही जाता है। मुलायम राजनीति में सक्रिय थे। उस दौरान वे एक दूसरे को शायद ही कभी-भार देख पाते थे, लेकिन मालती देवी अपने परिवार और 1973 में जन्मे बेटे अखिलेश यादव का पूरा ख़्याल रख रही थीं।

नब्बे के दशक (दिसंबर 1989) में जब मुलायम मुख्यमंत्री बने तो धीरे-धीरे बात फैलने लगी कि उनकी दो पत्नियां हैं, लेकिन वह इतने ताक़तवर नेता थे कि किसी की मुंह खोलने की हिम्मत ही नहीं पड़ती थी। बहरहाल, नब्बे के दशक के अंतिम दौर में अखिलेश को साधना गुप्ता और प्रतीक गुप्ता के बारे में पता चला। उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन बात सच थी। उस समय मुलायम साधना गुप्ता की कमोबेश हर बात मानने लगे थे। इसीलिए मुलायम के शासन (1993-2007) में साधना गुप्ता ने अकूत संपत्ति बनाई। आय से अधिक संपत्ति का उनका केस आयकर विभाग के पास लंबित है। बहरहाल, 2003 में अखिलेश की मां मालती देवी की बीमारी से निधन हो गया और मुलायम का सारा ध्यान साधना गुप्ता पर आ गया। हालांकि वह इस रिश्ते को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं थे।

मुलायम और साधना के संबंध की जानकारी मुलायम परिवार के अलावा अमर सिंह को थी। मालती देवी के निधन के बाद साधना चाहने लगी कि मुलायम उन्हें अपना आधिकारिक पत्नी मान लें, लेकिन पारिवारिक दबाव, ख़ासकर अखिलेश यादव के चलते मुलायम इस रिश्ते को कोई नाम नहीं देना चहते थे। इस बीच साधना 2006 में गुप्ता अमर सिंह से मिलने लगीं और उनसे आग्रह करने लगीं कि वह नेताजी को मनाए। लिहाज़ा, अमर सिंह नेताजी को साधना गुप्ता और प्रतीक गुप्ता को अपनाने के लिए मनाने लगे। 2007 में अमर सिंह ने सार्वजनिक मंच से मुलायम से साधना को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आग्रह किया और इस बार मुलायम उनकी बात मानने के लिए तैयार हो गए।

जो भी हो, अमर सिंह के बयान से मुलायम परिवार में फिर खलबली मच गई। लोग साधना को अपनाने के लिए तैयार ही नहीं थे। बहरहाल, अखिलेश के विरोध को नज़रअंदाज़ करते हुए मुलायम ने अपने ख़िलाफ़ चल रहे आय से अधिक संपत्ति से संबंधित मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दिया, जिसमें उन्होंने साधना गुप्ता को पत्नी और प्रतीक के रूप में स्वीकार कर लिया। उसके बाद साधना गुप्ता साधना यादव और प्रतीक गुप्ता प्रतीक यादव हो गए। अखिलेश ने साधना गुप्ता के अपने परिवार में एंट्री के लिए अमर सिंह को ज़िम्मेदार माना। तब से वह अमर सिंह से चिढ़ने लगे थे। वह मानते हैं कि साधना गुप्ता और अमर सिंह के चलते उनके पिताजी उनकी मां के साथ न्याय नहीं किया।

बहरहाल, मार्च सन् 2012 में मुख्यमंत्री बनने पर अखिलेश यादव शुरू में साधना गुप्ता को कतई घास नहीं डालते थे। इससे मुलायम नाराज़ हो गए और अखिलेश को झुकना पड़ा। इस तरह साधना गुप्ता ने मुलायम के ज़रिए मुख्यमंत्री पर शिकंजा कस दिया और अपने चहेते अफ़सरों को मन पसंद पोस्टिंग दिलाने लगीं। ‘द संडे गार्डियन’ ने सितंबर 2012 में साधना गुप्ता की सिफारिश पर मलाईदार पोस्टिंग पाने वाले अधिकारियों की पूरी फेहरिस्त छाप दी, तब साधना गुप्ता पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आईं।

अब यह साफ़ हो गया है कि मुलायम की विरासत को लेकर चल रहे मौजूदा संघर्ष में अखिलेश की लड़ाई सीधे लीड्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले अपने सौतेले भाई प्रतीक यादव से है। लखनऊ में रियल इस्टेट के बेताज बादशाह बन चुके प्रतीक को अपनी माता साधना गुप्ता का समर्थन मिल रहा है। चूंकि साधना नेताजी के साथ रहती हैं और उनकी बात मुलायम टाल ही नहीं सकते। यानी कह सकते हैं कि बाहरवाली से घरवाली बनी साधना गुप्ता की बात टालना फ़िलहाल मुलायम सिंह के वश में नहीं है।

लखनऊ के गलियारे में साधना गुप्ता को कैकेयी कहा जा रहा है। आमतौर पर परदे के पीछे रहने वाली साधना अखिलेश से तब सो बहुत ज़्यादा नाराज़ चल रही हैं, जब अखिलेश ने उनके आदमी गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। दरअसल, प्रतीक के बहुत ख़ासमख़ास गायत्री प्रजापति को मुलायम के कहने पर खनन जैसा मलाईदार महकमा दिया गया था। यह विभाग हुक्मरानों को हर महीने दो सौ करोड़ की अवैध उगाही करवाता है। जब इसकी भनक अखिलेश को लगी तो वह प्रतीक के रसूख और कमाई के स्रोतों पर हथौड़ा चलाने लगे। यह बात साधना को बहुत बुरी लगी। नाराज़ साधना गुप्ता को मनाने के लिए ही मुलायम ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी अखिलेश से छीनकर साधना खेमे के शिवपाल यादव को दे दी। अब उसी के चलते अब बाप-बेटे यानी अखिलेश और मुलायम आमने-सामने आ गए हैं।

इटावा जिले के सैंफई में 22 नवंबर, 1939 को स्व. सुघर सिंह यादव और स्व. मूर्ति देवी के यहां जन्में और पांच भाइयों में तीसरे नंबर के मुलायम सिंह यादव तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कुछ किया तो केवल और केवल अपने परिवार के लिए किया। परिवार को उन्होंने राजनीतिक और आर्थिक रूप से इतना ताक़तवर बना दिया है कि आने वाले साल में उनके कुटुंब के सैकड़ों लोग सांसद या विधायक होंगे। फ़िलहाल मुलायम समेत उनके परिवार में छह सांसद और तीन विधायक समेत 21 लोग महत्वपूर्ण पदों पर क़ाबिज़ हैं। भारतीय राजनीत में वंशवाद का तोहमत कांग्रेस पर लगता है, लेकिन यूपी में मुलायम परिवार ने कांग्रेस को मीलों पीछे छोड़ दिया है।

बहरहाल, इस मुद्दे पर मुलायम सिंह को समर्थन नहीं मिलने वाला, क्योंकि उन्होंने मुलसमानों को ख़ुश करने और अपने परिवार के ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को राजनीति में प्रमोट करने के अलावा कुछ नहीं किया। समाजवादी पार्टी के संस्थापक भी वह भले हों, लेकिन इस पार्टी का भविष्य अखिलेश यादव ही हैं। 2012 के विधान सभा चुनाव में पार्टी को जो जनादेश मिला था, वह मायावती की स्टैट्यू पॉलिटिक्स के नाराज़गी और अखिलेश की ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में जान फूंकने से हुई। राजनीतिक टीकाकार मानते हैं कि मुलायम सिंह यादव के लिए बेतहर होगा कि वह अखिलेश खेमे में रहे, क्योंकि शिवपाल-साधना की इमैज राज्य में अच्छे नेता की नहीं है। आम धारणा भी यही है, कि लूट-खसोट करने के आदी हो चुके शिवपाल-साधना के नैक्सस ने अखिलेश को स्वतंत्र रूप से काम ही नहीं करने दिया।

दिवंगत पत्रकार रजत सिंह के परिवार को दिल् ली सरकार से 5 करोड़ की आर्थिक सहायता की मांग

दिल्ली की केजरीवाल सरकार से आजतक के युवा दिवंगत पत्रकार रजत सिंह के परिवार को 5 करोड़ की आर्थिक सहायता की मांग करता है। हमे पता है की रजत हमारे बीच नहीं है। इसकी यादे ही हम लोगो के बीच रह जाएँगी। हमे तो है ही, लेकिन सबसे ज्यादा कष्ट उस परिवार के लिए है, जिनके बीच से एक युवा सदस्य हाथ से निकल गया। पैसा उस क्षति को तो पूरा नहीं कर सकता है, पर हा उस परिवार को हम लोग थोड़ा होंसला तो दे ही सकते है। आप सबसे भी निवेदन है कि आप भी विभिन्न स्तरों के जरिये सरकार से ये मांग करे। नरेंद्र भंडारी

राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव के उद्धघाटन सम ारोह में पहुंचे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी

राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव के उद्धघाटन समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की राजधानी में पहली बार आदिवाशी भाई बहनों के साथ दीपावली मनाई जायगी

The RSS strongly condemns the recent spate of brutal communal violence

RASHTRIYA SWAYAMSEVAK SANGH

AKHIL BHARATIYA KARYAKARI MANDAL,

Bhagynagar (Telangana)

Ashvin Krishna 8-10 yugabda 5118

(23-25 Oct 2016)

The RSS strongly condemns the recent spate of brutal communal violence by radical jehadi elements and the inaction of the ruling establishments in the states like West Bengal, Tamilnadu, and Karnataka and demands urgent action against the perpetrators of this violence and maintain vigil against such radical elements.

In West Bengal, after the recent state elections, the communal violence against Hindus has seen menacing rise which has claimed many lives and many more seriously wounded till now. In many villages, properties owned by Hindus are being damaged, womenfolk molested, temples and idols desecrated and the Hindus are forced to flee such areas. In another heinous incident, a dalit minor girl Mou Razak was attacked and killed in her house in South Ganzapara, P.S. Hanskhali, of Nadia district on 10thOctober. Recently, Hindus were obstructed from erecting the pandals for celebrating Durga puja and in more than a dozen incidents the immersion processions were also attacked. The law enforcement machinery remained only a mute spectator in such incidents even refusing to register FIRs. The government’s blatantly partisan attitude was admonished by Calcutta High Court in unequivocal words like ‘appeasement of minorities’ for forcing an irrational deadline on Durga idols immersion.

Several states in Southern Bharat including Tamilnadu, Kerala and Karnataka are witnessing similar rise of such Jehadi elements who have unleashed several violent attacks against Hindus and especially Swayamsevaks working in different nationalist organizations.

Tamilnadu has seen escalation of incidents where scores of workers of RSS, VHP, BJP and Hindu Munnnani have been attacked at places like Chennai, Coimbatore, Madurai and Dindigul, in last couple of months. The emboldening of radical elements due to willful neglect of the law enforcement machinery has resulted in killing of sangh workers at some of the above places, destruction of property worth crores of rupees, and atrocities on Hindu womenfolk. The violence unleashed on lady police force at Ambur speaks volumes of the writ of such forces which the administration is finding unable to curb. The call for ‘direct action’ by an important leader of a communal outfit should be seen as a warning of the alarming future scenario. It is all the more appalling that the state machinery is unwilling to act against these elements and succumbing to them and harassing the nationalist forces instead.

In Karnataka during this month, a sangh swayamsevak was murdered in broad daylight in a busy street of Bengaluru. Karnataka has seen many such incidents and killings of more than four Hindu activists in Mudbidri, Kodagu and Mysuru by Jehadi elements in recent days.

It is to be noted that all these are not isolated localized incidents but appear to be a part of nexus among the radicalized elements in the Southern states whose linkages are seen with the international terrorist organizations like IS as evident from the recent arrests in these states including Kerala and Telangana.

The RSS strongly urges the concerned state governments to punish the culprits after immediate and impartial investigation and remain ever vigilant for peace and harmony in the society.