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माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस शुभ म ुहूर्त को करें पूजा

ग्रेटर नोएडा में 30 अक्टूबर, 2016 दीपावली पूजन (दिवाली 2016) मुहूर्त
श्री महालक्ष्मी पूजन (लक्ष्मी पूजन) व दीपावली (दिवाली 2016) का महापर्व कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की अमावस्या में प्रदोष काल, स्थिर लग्न समय में मनाया जाता है. धन की देवी श्री महा लक्ष्मी जी का आशिर्वाद पाने के लिये इस दिन लक्ष्मी पूजन करना विशेष रुप से शुभ रहता है.

वर्ष २०१६में दिपावली (दिवाली 2016) , ३० अक्टूबर, रविवार के दिन की रहेगी. इस दिन चित्रा/स्वाती नक्षत्र है, इस दिन प्रीति योग तथा चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है. दिपावली व्यापारियों, क्रय-विक्रय करने वालों के लिये विशेष रुप से शुभ मानी जाती है.
दिपावली पूजन में निशिथ काल का प्रयोग कैसे करें

धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए. इसके अतिरिक्त समय का प्रयोग श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य मंन्त्रों का जपानुष्ठान करना चाहिए.

सावित्री बाई फूले बालिका इंटर कॉलेज में म नाई गई दिवाली

ग्रेटर नोएडा के सावित्री बाई फूले बालिका इंटर कॉलेज में “दीपावली पर्व” मनाया गया। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा गीत भजन , भाषण व कविताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस अवसर छात्राओं ने प्रदुषण रहित दिवाली का सन्देश दिया। इस मौके पर प्रधानचार्य रीमा डे ने समस्त जनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें दीऔर सभी से पटाखा रहित दिवाली मानाने का आग्रह किया।

सिटी हार्ट अकादमी में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन

ग्रेटर नोएडा के दादरी कटहेरा रोड स्थित सिटी हार्ट अकादमी में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्कूल के छात्र-छात्राओं व अध्यापकों समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्कूल की प्रधानाचार्य रूचि भाटी ने जय हो एक सामाजिक संस्था की तिरंगा लगाओ मुहीम के तहत लोगों को तिरंगे बांटे। इसी के साथ दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ तिरंगे का भी पूूजन करने का आहवान करते हुए तिरंगे के सम्मान की शपथ दिलाई।
सिटी हार्ट अकादमी की प्रधानाचार्य रूचि भाटी ने बताया कि शुक्रवार को स्कूल में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों द्वारा मेक इन इंडिया के नारे के तहत शहीदों की स्मृति में बडे ही प्यारे व सुंदर दीप बनाए गए। वहीं स्कूल के डॉयरेक्टर संदीप भाटी ने समारोह में मौजूद लोगों को तिरंगे का महत्व समझाते हुए सभी को जय हो सामाजिक संस्था के तिरंगा लगाओ अभियान के तहत तिरंगे बांटे।
इस अवसर पर विजय रावत, चंचल चंदेल, शशी भाटी, दीप शिखा, अजय शर्मा, अदीती, नीतू, विजय रावत, चंद्रकांत, अरविंद कुमार आदि लोग मौजूद थे।

CHINA YUAN SLIDING AGAINST DOLLAR COURTSEY INDIA

*भारत की जनता के बायकॉट से धड़ाम हुआ चीन, 6 साल पीछे पहुंचा*

बीजिंग (28 अक्टूबर):भारत में चीनी सामानों के बायकॉट का असर ड्रैगन के मुद्रा पर भी देखा जा रहा है। चीन की मुद्रा युआन की केंद्रीय समता दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह वर्षो के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है। चाइना फॉरेन एक्सचेंज ट्रेड सिस्टम के मुताबिक आन की केंद्रीय समता दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 122 आधार अंक घटकर 6.7858 हो गई है।
डॉलर के मुकाबले युआन का केंद्रीय समता मूल्य प्रत्येक कारोबारी दिन अंतरबैंक बाजार खुलने से पहले बाजार के विविध घटकों द्वारा पेश मूल्य के भारित औसत के बराबर होता है।

Ra 1000 CRORE PACKAGE DEMANDED FOR 1984 SIKH RIOTS BY DGMC

*कश्मीरी पंडितों की तर्ज पर सिक्खों को न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की उठी मांग*

*दिल्ली कमेटी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दीवानी मामलों की जांच के लिए एस.आई.टी. बनाने की वकालत की*

*कातिलों के सियासी सफर को समाप्त करने में अकाली दल की बड़ी भूमिका : जी.के.*

नई दिल्ली (29 अक्टूबर 2016) 1984 सिक्ख कत्लेआम के दौरान सिखों के हुए आर्थिक नुकसान की पड़ताल करने के लिए विशेष जांच टीम (दीवानी मामले) बनाने की गुहार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लगाते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों की तर्ज पर न्युनतम 1000 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की वकालत की है। कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के कांफ्रैंस हाल में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री को कमेटी द्वारा पत्र भेजकर इस संबंधी की गई मांग की जानकारी दी।

जी.के. ने बताया कि केन्द्र सरकार ने फौजदारी मामलों के लिए पहले ही विशेष जांच टीम बनाई हुई है जो कि मौजूदा समय में बंद हो चुके आपराधिक मामलों की छानबीन कर रही है। परन्तु 1 नवम्बर से 4 नवम्बर 1984 तक पूरे देश में हुए सिक्खों के कत्लेआम के साथ ही उनकी सम्पति को भी लूटा और जलाया गया था। जिसके नुकसान की भरपाई करने के लिए किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। जी.के. ने 1984 सिक्ख कत्लेआम तथा कश्मीरी पड़ितों को आंतकवाद के कारण झेलनी पड़ी परेशानियों की भी तुलना करते हुए सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों के मुकाबले सरकार द्वारा कम तवज्जों देने का भी खुलासा किया।

जी.के. ने कहा कि 1990 से 2001 तक के 11 वर्ष के कालखंड के दौरान 399 कश्मीरी पंड़ित आंतकवाद का शिकार होकर मारे गये थे। परन्तु नवम्बर 1984 में पूरे भारत में लगभग 8000 तथा अकेले दिल्ली में 4000 सिक्खों की हत्या की गई थी। जी.के. ने कहा कि आंतकवाद का दंश झेलने वाले कश्मीरी पंड़ितों को अपनी सम्पति, जेवर तथा अन्य कीमती सामान बचाने के लिए 11 वर्ष का लम्बा समय प्राप्त हुआ था परन्तु सिक्खों को कत्लेआम से पहले अपने कीमती सामान की रक्षा के लिए 11 मिन्ट भी प्राप्त नहीं हुए थे। कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों का नरसंहार तथा नुकसान 10 गुणा अधिक होने का दावा करते हुए जी.के. ने कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों को प्राप्त हुई सरकारी आर्थिक सहायता को ‘‘ऊँंट के मुंह में जीरा’’ बताया।

सिक्खों के नुकसान की भरपाई के लिए तुरन्त न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की प्रधानमंत्री से मांग करते हुए जी.के. ने सिक्खों की जलाई, लूटी, चोरी तथा कब्जाई गई सम्पति के बदले मिलने वाली राहत राशि को इन्साफ पंसद देश के नागरिकों का पहला हक भी बताया। जी.के.ने साफ किया कि कमेटी यह मांग कश्मीरी पंड़ितों के खिलाफ किसी दुर्भावना की वजह से नहीं कर रही है बल्कि सरकार की नीतियों में अन्तर को सार्वजनिक करना हमारी मंशा है। 1675 में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंड़ितों को जबरन धर्मान्तरण करने के दिये गये फुरमान के खिलाफ दिल्ली के चांदनी चौंक में तिलक और जनेऊं की रक्षा के लिए सिक्खों के 9वें गुरू तेग बहादर जी द्वारा दी गई शहीदी को भी इस अवसर पर जी.के. ने याद किया।

पत्रकारों के सवालों के जवाब देने के दौरान जी.के. ने माना कि बीते 32 सालों के दौरान कत्लेआम के बड़े गुनाहगार सज्जन कुमार और जगदीश टाईटलर को बेशक कानूनी तौर पर दिलवाने में हम कामयाब ना हुए हो पर उनके सियासी सफर के खात्में में अकाली दल की बड़ी भूमिका है। जी.के. ने कमेटी द्वारा कत्लेआम की याद में बनाये गये स्मारक का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रण पत्र भेजने की जानकारी दी।

इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह फतेह नगर, मुख्य सलाहकार कुलमोहन सिंह, कमेटी सदस्य रविन्दर सिंह खुराना, परमजीत सिंह चंढ़ोक, हरविन्दर सिंह के.पी., हरदेव सिंह धनौआ, हरजिन्दर सिंह, जीत सिंह, धीरज कौर, गुरमीत सिंह लुबाणा, कानूनी विभाग के को-चेयरमैन जसविन्दर सिंह जौली, अकाली नेता हरजीत सिंह बेदी एवं गुरमीत सिंह फैडरेशन मौजूद थे।

कश्मीरी पंडितों की तर्ज पर सिक्खों को न्य ुनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की उठी मांग

*कश्मीरी पंडितों की तर्ज पर सिक्खों को न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की उठी मांग*

*दिल्ली कमेटी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दीवानी मामलों की जांच के लिए एस.आई.टी. बनाने की वकालत की*

*कातिलों के सियासी सफर को समाप्त करने में अकाली दल की बड़ी भूमिका : जी.के.*

नई दिल्ली (29 अक्टूबर 2016) 1984 सिक्ख कत्लेआम के दौरान सिखों के हुए आर्थिक नुकसान की पड़ताल करने के लिए विशेष जांच टीम (दीवानी मामले) बनाने की गुहार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लगाते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों की तर्ज पर न्युनतम 1000 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की वकालत की है। कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के कांफ्रैंस हाल में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री को कमेटी द्वारा पत्र भेजकर इस संबंधी की गई मांग की जानकारी दी।

जी.के. ने बताया कि केन्द्र सरकार ने फौजदारी मामलों के लिए पहले ही विशेष जांच टीम बनाई हुई है जो कि मौजूदा समय में बंद हो चुके आपराधिक मामलों की छानबीन कर रही है। परन्तु 1 नवम्बर से 4 नवम्बर 1984 तक पूरे देश में हुए सिक्खों के कत्लेआम के साथ ही उनकी सम्पति को भी लूटा और जलाया गया था। जिसके नुकसान की भरपाई करने के लिए किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। जी.के. ने 1984 सिक्ख कत्लेआम तथा कश्मीरी पड़ितों को आंतकवाद के कारण झेलनी पड़ी परेशानियों की भी तुलना करते हुए सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों के मुकाबले सरकार द्वारा कम तवज्जों देने का भी खुलासा किया।

जी.के. ने कहा कि 1990 से 2001 तक के 11 वर्ष के कालखंड के दौरान 399 कश्मीरी पंड़ित आंतकवाद का शिकार होकर मारे गये थे। परन्तु नवम्बर 1984 में पूरे भारत में लगभग 8000 तथा अकेले दिल्ली में 4000 सिक्खों की हत्या की गई थी। जी.के. ने कहा कि आंतकवाद का दंश झेलने वाले कश्मीरी पंड़ितों को अपनी सम्पति, जेवर तथा अन्य कीमती सामान बचाने के लिए 11 वर्ष का लम्बा समय प्राप्त हुआ था परन्तु सिक्खों को कत्लेआम से पहले अपने कीमती सामान की रक्षा के लिए 11 मिन्ट भी प्राप्त नहीं हुए थे। कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों का नरसंहार तथा नुकसान 10 गुणा अधिक होने का दावा करते हुए जी.के. ने कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों को प्राप्त हुई सरकारी आर्थिक सहायता को ‘‘ऊँंट के मुंह में जीरा’’ बताया।

सिक्खों के नुकसान की भरपाई के लिए तुरन्त न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की प्रधानमंत्री से मांग करते हुए जी.के. ने सिक्खों की जलाई, लूटी, चोरी तथा कब्जाई गई सम्पति के बदले मिलने वाली राहत राशि को इन्साफ पंसद देश के नागरिकों का पहला हक भी बताया। जी.के.ने साफ किया कि कमेटी यह मांग कश्मीरी पंड़ितों के खिलाफ किसी दुर्भावना की वजह से नहीं कर रही है बल्कि सरकार की नीतियों में अन्तर को सार्वजनिक करना हमारी मंशा है। 1675 में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंड़ितों को जबरन धर्मान्तरण करने के दिये गये फुरमान के खिलाफ दिल्ली के चांदनी चौंक में तिलक और जनेऊं की रक्षा के लिए सिक्खों के 9वें गुरू तेग बहादर जी द्वारा दी गई शहीदी को भी इस अवसर पर जी.के. ने याद किया।

पत्रकारों के सवालों के जवाब देने के दौरान जी.के. ने माना कि बीते 32 सालों के दौरान कत्लेआम के बड़े गुनाहगार सज्जन कुमार और जगदीश टाईटलर को बेशक कानूनी तौर पर दिलवाने में हम कामयाब ना हुए हो पर उनके सियासी सफर के खात्में में अकाली दल की बड़ी भूमिका है। जी.के. ने कमेटी द्वारा कत्लेआम की याद में बनाये गये स्मारक का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रण पत्र भेजने की जानकारी दी।

इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह फतेह नगर, मुख्य सलाहकार कुलमोहन सिंह, कमेटी सदस्य रविन्दर सिंह खुराना, परमजीत सिंह चंढ़ोक, हरविन्दर सिंह के.पी., हरदेव सिंह धनौआ, हरजिन्दर सिंह, जीत सिंह, धीरज कौर, गुरमीत सिंह लुबाणा, कानूनी विभाग के को-चेयरमैन जसविन्दर सिंह जौली, अकाली नेता हरजीत सिंह बेदी एवं गुरमीत सिंह फैडरेशन मौजूद थे।

आल इंडिया टेरोरिस्ट फ्रंट द्वारा कमर्शिय ल बेल्ट में दिए जलाकर शहीदों को नमन किया गया।

ग्रेटर नोएडा में आल इंडिया टेरोरिस्ट फ्रंट द्वारा कमर्शियल बेल्ट में भारत के नक़्शे के अनुरूप दिए जलाकर शहीदों को नमन किया गया।

New Zealand Trade Mission to India Recognises STAAH for Innovation and Success

John Key, the Prime Minister of New Zealand, has recently completed a trade mission to India, accompanied by his wife Bronagh Key.

The purpose of this visit was to promote bilateral trade and investment talks, strengthen political and economic relationships, and seek security and intelligence co-operation between New Zealand and India.

 

Also joining the Prime Minister was a high level delegation which included Members of Parliament and representatives of educational, cultural and business organisations. The three-day mission began on Tuesday 25 October in Mumbai and ended on Thursday 27 October in New Delhi.

During the mission the Prime Minister recognised several businessmen from the tourism, technology and innovation sectors for their contribution to bilateral trade between the two countries.

This included Gavin Jeddo, Founder and Product Director of STAAH – an Auckland-based privately owned technology company that provides cloud-based channel management and booking engine technology to accommodation operators such as hotels, motels, holiday resorts, vacation rentals, B&Bs and guest houses.

Apart from the recognition from NZ Prime Minister himself, STAAH hit a milestone by signing up The Lemon Tree to their platform.

Having pioneered channel management technology in the mid-2000s, Gavin established STAAH in 2008. In India, STAAH has partnered with Cleartrip, Goibibo, Travelguru, Hotel Dekho, Make My Trip and many more. STAAH has registered a 20% growth on a month-to-month basis since its commencement of operations in India. The bilateral engagement and multilateral co-operation agreement between New Zealand and India will further boost STAAH to grow in India.

Photo Caption: LEFT: Tarun Joukani (MD of India, STAAH), Gavin Jeddo (Founder, STAAH) and Brendon McCullum (cricketer). RIGHT: Gavin Jeddo receiving the honour of recognition from New Zealand Prime Minister, John Key