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बक्सर के डीएम मुकेश पांडये ने की ग़ाज़ियाबाद में खुदखुशी

गाज़ियाबाद – बक्सर के जिलाधिकारी मुकेश पांडेय ने गुरुवार शाम को यूपी के गाजियाबाद में आत्महत्या कर ली। 2012 बैच के आईएएस मुकेश पांडेय का शव गाजियाबाद स्टेशन से एक किलोमीटर दूर कोटगांव के पास रेलवे ट्रैक पर कटा हुआ मिला। गाजियाबाद के एसएसपी एचएन सिंह ने शव मिलने की पुष्टि की है। शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को किया जाएगा।
मूल रूप से बिहार के सारण जिले के निवासी मुकेश पांडेय गुरुवार सुबह ही बक्सर के उपविकास आयुक्त मोबिन अली अंसारी को प्रभार सौंप दिल्ली गए थे। वे लीला पैलेस होटल में ठहरे थे। पिछले दिनों ही बक्सर डीएम के तौर पर पदस्थापित किए गए थे। बक्सर में पदस्थापना से पहले वे कटिहार में डीडीसी थे।

पांडेय ने आत्महत्या से पहले शाम 6 बजे घरवालों को वाट्सएप किया था कि वे दिल्ली की एक इमारत से छलांग लगा आत्महत्या करने जा रहे हैं। घरवालों ने तुरंत दिल्ली पुलिस को जानकारी दी। दिल्ली पुलिस जब तक कुछ कर पाती पांडेय गाजियाबाद चले गए और ट्रेन से कटकर जान दे दी। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार मुकेश पांडेय ने वाट्सएप के जरिये घर में यह संदेश भेजा था कि मैं अपनी जिंदगी से तंग आकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरा अच्छाई पर से विश्वास उठ गया है। संदेश में उन्होंने कहा था कि मैं दिल्ली के जनकपुरी स्थित डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल मॉल की दसवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरा सुसाइड नोट दिल्ली के लीला पैलेस होटल के कमरा नंबर 742 में मेरे बैग में रखा हुआ है। मुझे माफ कर दें। मैं आप सबको बहुत प्यार करता हूं।
पुलिस को मुकेश पांडेय की लाश गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से 200 मीटर आगे यार्ड में रेलवे ट्रैक पर मिली। उनकी जेब से पर्स और सुसाइड नोट बरामद हुआ। डीसीपी विजय कुमार ने बताया कि मुकेश पांडेय के साथियों का फोन शाम करीब साढ़े छह बजे आया। पुलिस तुरंत डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल मॉल पहुंची लेकिन वहां ऐसी किसी तरह की घटना की जानकारी नहीं मिली। एक सीसीटीवी फुटेज देखने से पता चला कि मुकेश पांडेय शाम 5:55 बजे मॉल से बाहर जा रहे थे। अन्य सीसीटीवी फुटेज में मेट्रो स्टेशन की तरफ जाते दिखे। डीसीपी ने बताया कि हमने मेट्रो का भी सीसीटीवी फुटेज चेक किया लेकिन उसमें वे नहीं दिखे। रात करीब 9 बजे हमें जानकारी मिली कि मुकेश पांडेय का शव गाजियाबाद इलाके में मिला है।

Proactive approach on Kashmir will pay dividends

किस्सा-ए-जम्मू-काश्मीर

कुछ लोग ( खास कर कांग्रेस) ये कह के मोदी सरकार की आलोचना करते हैं कि जब से मोदी PM हुए हैं , काश्मीर में हालात बेकाबू हो गए हैं ।

पहले तो ये जान लीजिए कि पहले हालात पे काबू कैसे रखा जाता था?

पहले Status Quo maintain किया जाता था। तुम हमको मत छेड़ो हम तुमको नही छेड़ेंगे। तुम भी ऐश करो और हमको भी करने दो।

अलगाववादी नेता ( हुर्रियत ) भारत सरकार की बांह मरोड़ के सीधे सीधे Blackmailing कर पैसे वसूलते थे। पैसे दो नही तो हम आगजनी , हड़ताल , पत्थरबाजी और आतंकी हमले करेंगे।

भारत सरकार बाकायदे वैधानिक तरीके से हज़ारों करोड़ के package काश्मीर को देती जिसे ये डाकू मिल के हज़म कर जाते। ये तो होता था वैधानिक पैकेज।

इसके अलावा अलगाववादी हुर्रियत नेताओं को under the table सैकड़ों करोड़ रु सालाना दिए जाते थे और बदले में शांति खरीदी जाती थी। और ये आतंकी हमारे आपके Tax Payer के पैसे पे ऐश अय्याशियाँ करते थे।

PDP के साथ BJP की साझा सरकार बन जाने से , BJP की सत्ता में भागीदारी से काश्मीर के आर्थिक package की लूट और बंदरबांट काफी हद तक रुक गयी है।

मोदी के आने के बाद निज़ाम बदला। शुरुआत बुरहान वानी के encounter से हुई। तब से अब तक 124 बुरहान कुत्ते की तरह घसीट के मार दिए गए और लगभग 150 के करीब बाकी है , रोज़ाना 2 – 4 मारे जा रहे हैं।

भारत सरकार का संकल्प है कि दिसंबर से पहले काश्मीर से आतंकी साफ कर देने है। कोशिश में कमी नही नही बाकी परिणाम ईश्वर के हाथ में है।

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NIA ने हुर्रियत की funding और हवाला रैकेट की जांच में कई नेता उठा लिए हैं और दिल्ली ले गयी है । कश्मीरी दिल्ली के नाम से हड़कता है। इस से पहले किसी हुर्रियत नेता को ज़्यादा से ज़्यादा नज़रबंद किया जाता था और श्रीनगर के निशात बाग के Resorts में पूरी ऐशो अय्याशी का इंतज़ाम होता था।

आज NIA ने हुर्रियत और उनके हवाला operators को दिल्ली में उलटा टांग रखा है। इसके बाद उनका तिहाड़ जाना निश्चित है।

काश्मीर में आम धारणा है कि जो एक बार तिहाड़ गया उसकी तो लाश भी वापस नही आई।

गिलानी और उसके दोनों बेटों पे तलवार लटकी हुई है । इनकी बेनामी संपत्तियों की जांच चल रही है। भारत सरकार बेरहमी से इनपे टूट पड़ी है।

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भारत सरकार आज काश्मीर में Proactive हो के काम कर रही है। आगे बढ़ के मार रही है। घर मे घुस के मार रही है।

जब आप proactive होंगे तो सामने वाले को प्रतिक्रिया देना मजबूरी है। आज काश्मीर में जो पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधि है वो इसी Proactive approach के कारण है ।

नाली में घुस के साफ करो तो बदबू तो उठेगी ही। पर इसके बाद सब साफ हो जाएगा ।

उम्मीद की किरण मत छोड़िये।

GUJRAT RAJYA SABHA ELECTION – NCP VOTES UNCERTAIN ?

गुजरात राज्यसभा चुनाव: एनसीपी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ा।

अहमदाबाद: कांग्रेस के दिन खराब चल रहे हैं. पिछले कई चुनावों में हर का मुंह देखने के बाद अब राज्यसभा चुनावों में भी उनके लिए बुरी खबर आ रही है. दरअसल शरद पवार की पार्टी एनसीपी के ताजा बयान में कहा गया है कि वह किसी की सहयोगी नहीं है. बता दें, गुजरात के राज्यसभा चुनावों में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल मैदान में हैं. विधायकों के बगावती तेवर झेल रही कांग्रेस को पुराने सहयोगी एनसीपी पर भरोसा था. पर अब पार्टी मझदार में है. एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी ने गुजरात में आठ अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए अभी तक किसी दल को समर्थन देने के बारे में निर्णय नहीं किया है. शरद पवार की पार्टी का राज्य में 2012 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन था और वर्तमान में उसके दो विधायक – कांधल जडेजा और जयंत पटेल हैं. दोनों विधायकों ने कहा था कि राष्ट्रपति चुनावों में उन्होंने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मीरा कुमार को वोट दिया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पांचवीं बार गुजरात से राज्यसभा में जाने के लिए प्रयासरत हैं.

AFFORDABLE HOUSES: Growth Drivers of Indian Real Estate Industry

> If we talk about affordable houses, it typically denotes the housing needs of the lower or middle income population. The Government of India has taken number of steps to make affordable house available to everyone.
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> Budget 2017 has proposed infrastructure status for affordable housing, a long-standing demand of developers, and also increased the allocation for the Prime Minister Awas Yojana from Rs 15,000 crore to Rs 23,000 crore, bringing the country closer to realising the Housing for All mission by 2022. Under this one crore houses are to be built by 2019 in rural India for the homeless and those living in ‘kaccha’ houses.
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> "For private developers affordable housing offers cheaper FSI but margins are thin since the real estate ecosystem does not provide streamlined processes, design and automation for construction works as mass volumes are required to make it a success." said, Vineet Relia, Managing Director, SARE Homes
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> Demand for an affordable housing have amplified, people who migrate from small cities to big find it difficult to own a house. For such buyers affordable house is mandatory choice.
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> "According to estimates, around 600 million people are expected to settle down in urban India by 2031, a rise of whopping 59 per cent over 2011. The current housing deficit in India stands at 19 million units, which in the absence of any meaningful intervention, is slated to double to 38 million units by 2030. Thus affordable Housing is the need of the hour. Fortunately, the government is collaborating with private builders to make affordable housing a reality. The most important factor that has provided a fillip to affordable housing is granting of infrastructure status. RERA has also infused fresh hopes in home -buyers. With the government grating slew of incentives to the sector, the sector has become a serious business arena for developers. According to ICRA report, affordable housing segment in India is set to grow at a faster pace than the rest of the real estate sector — at over 30 per cent in the medium term. Other factors that have given a fillip to affordable housing are massive urban inward migration” said Ssumit Berry, Managing Director, BDI Group
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> The RERA (Real Estate Regulatory Act) has been one of the biggest reforms that have heightened the real estate Industry in India. The pro-buyer attitude of this act has been highly appreciated by the investors. And it is expected to drive the growth rate beyond expectation. Indian real estate had witnessed a downfall prior to this. But the industry has become more transparent and responsible with the latest reforms.
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> India introduced GST (Goods Service Tax) on July 1. It has replaced the multiple taxes levied by the central and state governments and has subsumed of all the indirect taxes will boost the real estate industry especially affordable houses.

> “The gateway of Rajasthan, Bhiwadi has slowly emerged as a great investment zone for the home buyers. Offering all the lifestyle amenities found in a metro setting at comparatively lower prices makes it one of the most affordable destinations in the market. With its close proximity to the Gurugram, DMIC & Indira Gandhi International Airport make the region well connected. Due to this, the place has attracted a lot of industrial activity and is presently witnessing a robust development in the residential, commercial and industrial sectors. The area is proving to be a perfect option for those who have a dream to own their own homes” said, Rohtas Goel, CMD, Omaxe Ltd.

> Seeing this, a number of developers are entering into the affordable housing segment; many of them are brands who were earlier largely into luxury segments. SARE Homes, BDI, Omaxe etc are some of the developers who are showing great interest into this sector and are also trying to help a buyers dream of affordable house to fulfill.